जय गोरिया महाकाल 🙏🏿🙏🏿, छिपला केदार एक अज्ञात तीर्थ गाथा छिपला केदार की पिथौरागढ़ जनपद के सीमान्त क्षेत्र के दर्जनों गाँवों में अधिशासित आराध्य देव छिपलाकेदार धारचूला तहसील के बरम से लेकर खेत तक के सभी गाँवों के इष्ट देव के रूप में स्थापित है। प्रति दो वर्ष में छिपलाकेदार की यात्रा का आयोजन होता उक्त सभी ग्रामों में आयोजित होती है, जिसमें ग्रामों की छिपलाकोट से दूरी के अनुसार यात्रा 3-5 दिनों की होती है। छिपलाकेदार का निवास स्थान नाजुरी कोट के रूप में जाना जाता है। छिपला केदार यात्रा जिसे स्थानीय लोग केवला छिपला के नाम से पुकारते है सभी ग्राम अपने-अपने गाँवों से निकलकर नाजुरी कोट तक का सफर तय करती है जहाँ छिपला ताल है जिस ताल में स्नानादि करके नवयुवकों का मुण्डन इत्यादि कर्म सम्पन्न होता है। इस कुण्ड का जल प्रसाद स्वरूप वहां गये लोग घरों में लाते है। यह यात्रा कम मेला होता है जिसमें आखिरी के दिन ग्राम वापसी पर सम्बन्धित ग्राम में मेले का आयोजन किया जाता है। यह यात्रा जितने भी दिन की जिस गांव में हो नंगे पैरों से की जाती है। छिपला कुण्ड अब बात करें ...
उत्तराखंड के नैनीताल जिले में बसी एक सुंदर घाटी बेतालघाट । यह घाटी प्राकृतिक सुंदरता के बीच जितना सुंदर लगती है, उतनी ही रहस्यमयी भी है। सबसे ज्यादा रहस्यमयी है, इसका नाम बेतालघाट । इस स्थान का नाम बेतालघाट यहां के रक्षक यहां के लोकदेवता बेताल के नाम से पड़ा है। जैसा कि हमने बिक्रम बेताल की कहानियों में देखा और पढ़ा है। वही सब यहाँ वास्तविक में है। लगभग 25 -30 साल पहले की बात है। बेतालघाट में निकली बेताल के बेटे की बारात या बेताल की बारात सारे देश में चर्चा का विषय रही। बेतालघाट के महाप्रतापी क्षेत्रपाल बेताल या नकुवा बुबु को महादेव का सबसे बड़ा गण माना जाता है। बेताल महाराज महादेव के सभी गणों में सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं। भूत पिचास, अलाइ बलाई ,डाकिनी शाकिनी , आदि सभी गणों को नियंत्रित करने का कार्य भी बेताल देवता करते हैं। नकुवा देवता मुख्यतः उग्र स्वभाव के होने के कारण भी , अपने भक्तों से स्नेह रखते हैं। तथा उनकी रक्षा करते हैं। नकुवा बुबु समस्त बेताल घाटी की सुरक्षा एवं संरक्षण करने वाले क्षेत्रपाल हैं। ये महादेव की तरह आपने भक्तों से स्नेह और उनकी रक्षा करते हैं। और गलती ह...