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यदि मैं दोबारा जन्म लूं भारत माता तेरी भूमि में।

यदि मैं दोबारा जन्म लूं भारत माता तेरी भूमि में। तुझसे एक गुजारिश है मेरी, मुझे तेरे उस छोटे से राज्य उत्तराखंड में ही जन्म लेना है। जहां सभ्यता, शालीनता, सीधापन, संस्कार आज भी उसकी पहचान है। मुझे गर्व है कि मैं भारत के उस छोटे से राज्य उत्तराखंड  का  निवासी हूं। मुझे गर्व है ऐसे राज्य से होने में, जहां के लोग आज भी दूसरों के सम्मान में ही अपना सम्मान ढूंढते हैं। मुझे गर्व होता है यह कहने में कि मैं पहाड़ी हूं उत्तराखंडी हूं। जहां नदियों को माता और पहाड़ों को देवताओ के रूप में पूजा जाता है।  जहां आज भी बिना देवी शक्ति के अनुमती के कोई कार्य पूरा नहीं होता।  जहां हर फसल को सबसे पहले भगवान को अर्पित किया जाता है। जहां के हर एक त्योहार बस किसान भाइयों के नाम होते हरेला,फुलदेही,घी-सग्यान, घुघती त्यौहार, औऱ अन्य त्योहार।  कि बस तुझसे यही दुआ है मेरी कि अगला जन्म मुझे मिले तो उत्तराखंड का वासी ही बनु, मैं हर जन्म में पहाड़ी ही रहना चाहता हूं धन्यवाद  जय उत्तराखंड राहुल पुरोहित

पूर्णागिरि मंदिर, देवभूमि उत्तराखण्ड

पूर्णागिरि मंदिर, देवभूमि उत्तराखण्ड के टनकपुर में अन्नपूर्णा शिखर पर है। यह 108 सिद्ध पीठों में से एक है। यह स्थान महाकाली की पीठ माना जाता है। यहां पर माता सती की नाभि का भाग भगवान विष्णु के चक्र से कटकर गिरा था। इस शक्तिपीठ की अनोखी कहानी है, यहां चमत्कार तो जैसे आम जीवन का हिस्सा बन गए हैं। आइए जानते हैं गिरि मंदिर के बारे में खास बातें… भैरवनाथ देते हैं दर्शन की अनुमति:- चारों दिशाओं में स्थित मल्लिका गिरि, कालिका गिरि, हमला गिरि व पूर्णागिरि में इस पावन स्थल पूर्णागिरि को सर्वोच्च स्थान प्राप्त हुआ है। पूर्णागिरि पर्वत पर विराजमान देवी ने कई ऐसे चमत्कार भी किए जो लोगों को मां पूर्णागिरि की दैवीय शक्ति का अहसास कराते हैं। धाम की ओर रवाना होने से पहले देवी के द्वारपाल के रूप में भैरव मंदिर में बाबा भैरव नाथ की पूजा करने की परंपरा है। माना जाता है कि धाम के द्वार पर बाबा भैरवनाथ ही देवी के दर्शन के लिए जाने की अनुमति देते हैं। मन्नत से जुड़ी है झूठा मंदिर की गाथा:- दर्शन कर लौटते वक्त रास्ते में स्थापित महाकाली और झूठा मंदिर की पूजा की जाती है। झूठा मंदिर की गाथा द...